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Showing posts from October, 2021

कविता

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 एक कविता हर माॅं के नाम घुटनों से रेंगते-रेंगते कब पैरो पे खरा हुआ, तेरी ममता कि छाॅंव मे  न जाने कब मैं बरा हुआ।  काला टिका दुध-मलाई आज भी सब कुछ वैसा है, मैं ही मैं हुॅं हर जगह  प्यार ये तेरा कैसा हैं। सिधा-साधा भोला-भाला मैं ही सबसे अच्छा हुॅं, कितना भी हो जाऊॅं बरा माॅं ! मै आज भी तेरा बच्चा हुॅं ......मै आज भी तेरा बच्चा हुॅं।

Respect Your parents

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 मेरे बाबाजान जो मागे दे दिया कर ऎ-जिन्दगी कभी तो तु मेरे बाप जैसी बन के दिखा कभी वक्त मिले तो अपने मा-बाप की चेहरो की तरफ़ देखना आपको पता चलेगा के आपका मुस्तकबिल (Future) बनाते-बनाते वो खुद कितना टुट चुके है ! जैब खाली हो फ़िर भी मना नही करते है, बाप से अमीर आदमी देखा नही दुनिया मे मेने! जिसको मा-बाप की बात समझ नही आती दुनिया उसे अछे से समझा देते है! कन्धो पर मेरे जब  बोझ बढ जाते है तो मेरे बाबा मुझे शिद्दत से याद आते है चाहे कितना ही बुडा हो मगर घर का सबसे मजबुत सुतुन(Pilar) बाप ही होता है! मा-बाप दुनिया की  हर ठोकर बरदास्त क्र सकते है सिवाय औलाद हाथो लगी ठोकर आपने मा-बाप से ऊची अवाज  मे बात मत किया करो जिस दिन वो खामोश(Die) हो गये उस दिन उसकी अवाज को तरसोगे! बाप ऎसी किताब है जिस पर बोहोत से तजुर्बात तहरिर होते है जो जिन्दगी गुजारने मे रहनुमाई करते है इस उसे अपने से कभी दुर मत रखे!  इस दुनिया मे आपका बाप वो वाहिदनशक्श [ Single man] है जो चाहता है कि आप उस से ज्याद कामयाब हो !  कयामत से कम नही होता वो दिन जिस दिन मा-बाप मे से कोइ एक नही होता मा-बाप कि जरुरत ...

My friends

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 दोस्त मै यादो का किस्सा खोलु तो कुछ दोस्त बोहोत याद आते है, मै गुजरे पल को सोचु तो कुछ दोस्त बोहोत याद आते है!                अब जाने कोन सी नगरी मे है वो आबाद है मुद्दत से जाकर जहाॅं जाकर,                मै देर रात तक जागु तो कुछ दोस्त बोहोत याद आते है! कुछ बाते थी फ़ुलो जैसी, कुछ लैहजे खुशबु जैसे थे, मै शहरे चमन मे तहलु तो कुछ दोस्त बोहोत याद आते है!                सबकी जिन्दगी बदल गई है एक नये साचे मे ढल गई है, किसी को नौकरी से फ़ुरसत नही,                और किसी को दोस्तो की जरुरत नही ! सारे यार गुम हो गये है, तु से तुम और आप हो गये है, धीरे-धीरे उम्र कट जाती है जिन्दगी यादो की लहर बन जाती है !               कभी किसी की याद बोहोत तरपाती है और कभी यादो के सहारे जिन्दगी कट जाती है,               किनारो पर सागर के खजाने नही आते फ़िर जिन्दगी मे दोस्त पुराने न...

Chhat Puja

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  जय छठी मइया ! छठ पूजा और बचपन की यादें     छठ पूजा, यह बस एक त्यौहार ही नहीं, बल्कि एक भावना है। यह एक ऐसी भावना है जो हर एक बिहारी और पूर्वांचल के व्यक्ति के दिल में बसी हुई है। जब भी कहीं किसी भी बिहारी या पूर्वांचल के व्यक्ति के कानों में शारदा सिन्हा के गीत की आवाज पड़ती है तो बस सबको उनके गांव तथा छठ पर्व की याद आ जाती है। सभी को छठ का गीत सुनते ही अपना गांव और गांव के पास का घाट याद आने लगता है। पुराने समय में जब हर जगह बिजली नहीं हुआ करती थी तब दिवाली और छठ के त्यौहार के दिन सभी लोग अपने अपने घरों के सामने तथा सड़कों पर और आसपास के नदी तालाबों के घाट पर इतने सारे दीपक जलाया करते थे कि इसके सामने आजकल की रंगीन बल्ब भी फेल है। आज भले ही हमारे पास चाहे जितने मर्जी बिजली की लाइट आ गई हो मगर आज हम सभी को वो पुराने तेल के दीपक याद आते हैं। दीपक की लौ के झिलमिलाहट कहीं खो गई है।  आजकल के बिहार तथा पूर्वांचल के सभी युवा रोजगार के लिए अपने अपने गांव को छोड़कर शहरों में जा बसे हैं। कितने ही ऐसे लोग होंगे जो त्योहारों पर अपने घर जाना भी नसीब नहीं कर पाते होंगे। क्योंकि...

MAA

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            माॅं                गर-दिसे मेरा बिगारेगी मै माॅं के खैंचे हुये हजार मे से एक हुॅं। लाख गिर्द अपने हिफ़ाजत की लकीरे खीचो एक मे भी नही माॅं की दुआओ जैसी।  मुझे मुहब्बत है  अपने हाथो की तमाम उंगलियो से  ना जाने कोन से उगलिया पकर कर  मा ने चलना सिखाया होगा  मुख्तशर-सी जिन्दगी होते हुए  बढ  जाएगी मा की आखे चुम लिजिए रोशनी बढ जाएगी  हालात बुरे थे मगर रखती थी नवाब बना कर हम गरीब थे ये सिर्फ़ मा जनती थी   चुम लेना उदासिया सारी कोइ माॅं की मिसाल था ही नही । उम्र भर तेरी मुह्ब्बत मेरी खिदमत करती रही मै  जब तेरी खिदमत के काबिल जब हुआ  चल-बसी ।  दर्द चला जाता है मेरे घर  की दहलिज  से उदास होकर परेशान नही होता मै कभी अपने मा के पास बैठकर। वो लोरियो मे सुनाति थी आयते मुझको मै मा की याद मे इसको खुदा को चुमता हु तेरे हाथ के करामत की बात ही क्या मा मुझको तो तेरे कदमो की मिट्टी भी शिफ़ा देती है मा। कहते है की पहला प्यार कभी भुलाया नही जाता  फ़िर पत...

Short inspiring story

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  Seeing opportunity in obstacles Once there was a king who was curious but wealthy. He decided to test his fellow people to know who has a got a good attitude in life and who would spare some time for country’s progress. He placed a huge boulder right at the middle of the road and hid in a nearby place to see if anyone would make an attempt to move it off. He saw some wealthy merchants and courtiers passing by the road. None of them made any attempt to move it off but simply walked away while some others blamed the king for not maintaining roads. Later, a peasant came the way with a load of vegetables and saw the boulder. He kept his load down and tried to move the boulder away. After strenuous effort, he succeeded in moving it away. He saw a purse lying in the place of the boulder. It contained many gold coins and a note from the king which read ‘this is the reward for the person who moves the boulder away’. Moral:  It is quite common for people to run away from problems and...